एक ब्रिटिश एक्सप्लोरर पर्सी फॉरेस्ट ऐमेजॉन रेनफॉरेस्ट में एक ऐसे शहर की तलाश में निकले थे जिसके बारे में कहा जाता है कि वह पूरा सोने से बना हुआ है और उसका किंग रोजाना सोने के पाउडर से नहाता है। लेकिन उस दिन पर्सी फॉस्फेट अपने कैंप से निकले तो थे लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटे। एमेजॉन रेनफॉरेस्ट दुनिया का सबसे बड़ा रेनफॉरेस्ट है, जो हैरतअंगेज तौर पर आठ कंट्री आपस में शेयर करती है। इसका एरिया 70 लाख स्क्वायर किलोमीटर है। इतने बड़े एरिया में इंडिया जैसे दो देश और यूनाइटेड किंगडम जैसे 28 देश फिट आ सकते हैं। जैसे ओशन का बहुत बड़ा हिस्सा अभी तक हम इंसान एक्सप्लोर नहीं कर पाए। ऐसे ही एमेजॉन रेनफॉरेस्ट का भी बहुत बड़ा हिस्सा अभी तक इंसानों की पहुंच से दूर है। यहां प्लांट्स, एनिमल्स और माइक्रोब्स की ऐसी किस्में रहती हैं, जिनमें से अभी तक सिर्फ टेन पर्सेंट का पता लगाया गया है। हर दिन यहां नई स्पीशीज एक्सप्लोर की जाती है। एमेजॉन रेनफॉरेस्ट में करीब 40,000 करोड़ दरख्त मौजूद हैं और यही वजह है कि इस फॉरेस्ट को अर्थ की लंग्स भी कहा जाता है। पूरी दुनिया में जितनी भी ऑक्सीजन है, उसका ट्वेंटी परसेंट सिर्फ एमेजॉन रेन फॉरेस्ट रिलीज करता है। एक एस्टिमेट के मुताबिक, एमेजॉन फॉरेस्ट में करीब 20 लाख लोग रहते हैं, जिनका बाहर की दुनिया से कोई कनेक्शन नहीं है, क्योंकि एमेजॉन का काफी सारा हिस्सा अभी तक अन एक्सप्लोर है। लिहाजा, जंगल की इस डाल के नीचे जो कुछ छुपा है, वह भी अभी तक दुनिया के लिए एक न सुलझने वाला मामला बना हुआ है। एमेजॉन के जंगल की ऐसी ही चंद मिस्ट्रीज के बारे में आज हम जानेंगे। कुछ को तो सॉल्व कर लिया गया है, लेकिन बहुत सारी आज भी साइंस के पल्ले नहीं पड़ रही।

सबसे पहले बात करते हैं सिटी ऑफ कोल के बारे में एमेजॉन फॉरेस्ट की। आज तक की सबसे बड़ी मिस्ट्री है यहां की सिटी ऑफ गोल्ड जिसको एल्डर राडो भी कहा जाता है। कहा जाता है कि किसी दौर में यहां एक ऐसा शहर था जो पूरा सोने से बना होता था और यहां का किंग रोजाना सोने के पाउडर से नहाकर एमेजॉन रिवर में वह सारा सोना बहा देता था। जी हां, सिक्सटीन सेंचुरी में यूरोपियन साउथ अमेरिका में आए थे, जहां एमेजॉन फॉरेस्ट मौजूद है। वह अपने साथ काफी सोल्जर्स और इस इलाके पर कब्जा करने का प्लैन बनाकर आए थे। यहां उनका सामना एमेजॉन के लोकल लोगों से हुआ, जिन्होंने यहां अपने शहर बसाए हुए थे। यूरोपियन ने उनके बनाए हुए शहरों पर कब्जा कर लिया और सिक्सटीन सेंचुरी के आखिर में उनको खबर मिली कि एमेजॉन फॉरेस्ट के डीप में एक ऐसा शहर भी है जो पूरा सोने से बना हुआ है। तो इसी पर यूरोपियन ने इस एल्डर राडो सिटी की तलाश शुरू कर दी। पूरा एमेजॉन फॉरेस्ट छान लेने के बाद उनको यहां के बहुत सारे कबीले तो जरूर मिले, लेकिन जिस शहर की तलाश थी वह न मिल सका। जबकि यहां उनको काफी सारा सोना जरूर मिला। अगले 200 सालों तक तलाश जारी रखने के बाद आखिरकार एल्डर राडो को मिथ डिक्लेयर कर दिया गया। उसके बाद सेंचुरी में एक ब्रिटिश एक्सप्लोरर पर्सी फॉस्ट ने एल्डर को एक बार फिर से तलाश करने का फैसला किया। उन्होंने एमेजॉन में टोटल आठ एक्सपीडिशन किए
, लेकिन इस दौरान उनको एल्डर राडो तो दूर की बात, दूसरे शहर भी नहीं मिले, जिनका जिक्र यूरोपियन ने किया था। अपने आखिरी एक्सपीडिशन में पर्सी फॉरेस्ट एमेजॉन के बीच में मौजूद थे। जब आखिरी बार उनसे राब्ता हुआ था। उसके बाद वह तलाश में निकले तो दोबारा कभी लौटकर नहीं आए। यह टवंटी नाइंथ में ट्वेंटी फाइव का दिन था और जिस जगह से वह गायब हुए वह ब्राजील की स्टेट मैट ग्रॉस थी। उनको कई महीनों तक तलाश किया गया लेकिन न ही पर्सी फॉसिल मिले और न ही उनकी डेड बॉडी। साइंटिफिक कम्यूनिटी का मानना है कि यह जगह इंसानों के रहने के काबिल नहीं है, लिहाजा यहां कोई शहर या विलेज नहीं बन सकता। लेकिन वक्त के साथ जब टेक्नॉलजी काफी एडवांस हो गई तो फिर एमेजॉन में कुछ ऐसे निशानात मिले, जिससे यह जाहिर होता है कि किसी दौर में यहां इंसानों ने पूरे पूरे शहर बसाए हुए थे। असल में पर्सी फॉस्फेट जिस जगह तलाश कर रहे थे, वह जगह तो बिल्कुल सही थी लेकिन ढूंढने का तरीका सही नहीं था। यहां कई मकाम बात पर रिसर्चस को जमीन के अंदर ह्यूमन वेस्ट दबा हुआ मिला है। साइंस दानों ने एमेजॉन में कई कमाल पर लिडार स्कैनिंग डिवाइस का इस्तेमाल करके घने जंगल की लेयर के नीचे पत्थर से बने स्ट्रक्चर्स भी ढूंढे हैं, जिनको वक्त के साथ साथ जंगल ने छुपा दिया है।

नेशनल जियोग्राफिक की टीम ने भी कैरेबियन के साहिल से 15 किलोमीटर अंदर एमेजॉन में एक ऐसा शहर तलाश किया है, जिसमें ढाई हजार साल पुराने पूरे पूरे स्ट्रक्चर पहाड़ों के अंदर। दबे हुए पाए गए। लेकिन इनमें एल्डर ऑर्डर कौन सा है और आखिर ये इतने बड़े एमेजॉन फॉरेस्ट में किस जगह मौजूद था, यह आज तक साइंटिफिक कम्यूनिटी के लिए एक मिस्ट्री बना हुआ है। नंबर फोर एमेजॉन के इस वसी भयावाह जंगल में काफी ऐसे कबीले भी रहते हैं, जिन्होंने आज तक बाहर की दुनिया को देखा ही नहीं है। जी हां, ये लोग जंगल में कैसे जिंदगी गुजारते हैं, इसके बारे में एंथ्रोपोलॉजी भी सही से नहीं जानते। इनमें से एक कबीला त्रिपुरा के नाम से जाना जाता है, जो वेस्टर्न ब्राजील में रहता है। इस कबीले में पहले हजारों लोग थे, लेकिन अभी सिर्फ 15 से 20 ही बचे हैं। इस कबीले के बारे में हम भी एक के बाद ही जान पाए हैं, जब पहली बार इनका बाहर की दुनिया से राब्ता हुआ था। उनकी लैंग्वेज से ऐसा लग रहा था कि शायद वह अपना दुख दर्द बयान करना चाहते हैं। एंथ्रोपॉलजी ने जब उनकी बातों को डिकोड किया तो मालूम पड़ा कि उनका कबीला पहले काफी स्ट्रोंग हुआ करता था। लेकिन फिर कुछ कब्जा माफिया ने फॉरेस्ट में माइनिंग करने के लिए उनके तमाम साथियों को बुरी तरह मार डाला, जिनमें से ये चंद लोग बच गए थे। ऐसे पता नहीं कितने ट्राइब्स हैं जो एमेजॉन जंगल के बीच अपनी दुनिया बसाये बैठे हैं। ये लोग कहां से आए थे?



क्या इनका हजारों साल पहले यहां बसने वाले कबीलों से कोई कनेक्शन है? इस बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया। नंबर थ्री सदियों से हिस्टोरियन को यह कन्फर्म नहीं था कि एमेजॉन में रहने वाले लोग यहां कब आए थे, लेकिन टू थाउजेंड में यह पहेली तब सुलझने लगी, जब आर्कियोलॉजिस्ट को कोलंबिया के करीब एमेजॉन फॉरेस्ट में पहाड़ पर कुछ पेंटिंग्स बनी हुई दिखाई दीं। ये बड़े बड़े पत्थर पहाड़ के अंदर पूरी तरह दबे हुए थे और इन पेंटिंग्स को समझने के लिए इनको एक्सपोज करना बहुत जरूरी था। लिहाजा आर्कियोलॉजिस्ट ने यहां 13 किलोमीटर की खुदाई की तो मालूम पड़ा कि किसी दौर में ये पत्थर एक कार के अंदर मौजूद थे।

इस 13 किलोमीटर की कार में जो पेंटिंग्स बनी हुई पाई गई वो करीब 12,000 साल पुरानी थी। उस वक्त आखिरी आइस एज की एंडिंग चल रही थी और जाहिर है उस वक्त यहां जंगल नहीं बल्कि सिर्फ बर्फ ही बर्फ हुआ करती थी। इन पेंटिंग्स में कुछ ऐसे जानवर भी बने पाए गए जो सिर्फ आइस एज में ही हुआ करते थे। जैसा कि मिस्टर डांस और जायंट स्लॉट्स। इन पेंटिंग्स से यह भी अंदाजा लगाया गया कि उस दौर में यहां इंसान किस हालत में रहते थे और कैसे वो अपने से भी बड़े जानवरों का शिकार करते थे। नंबर टू टूथ हाउस में साइंटिस्ट तब चौंक गए जब उनको नॉर्थ ब्राजील में एमेजॉन फॉरेस्ट के महाराज आयलैंड पर एक मरी हुई हम बैक वेल मिली।

By Naveen

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