इस्लाम धर्म में बहन के साथ निकाह क्यों करते हैं?

दोस्तों आप यह बात जानते ही होंगे कि इस्लाम धर्म में अपनी चचेरी या ममेरी बहन से शादी करने का रिवाज है। इस्लाम धर्म में सिर्फ अपनी सगी बहन को छोड़कर बाकी परिवार की किसी भी दूसरी कजिन बहन से शादी की जा सकती है। इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा दूसरा धर्म है जो कि तेजी से फैल रहा है। पहले नंबर पर ईसाई धर्म आता है जिसे दुनिया के सबसे ज्यादा लोग अपनाते हैं और दूसरे नंबर पर इस्लाम आता है। दुनिया में बहुत सारे अलग-अलग धर्म से है लेकिन उनके बारे में जो भी बातें हमारे सामने आती है असल में वह सारी सच नहीं होती। आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे इस्लाम धर्म में होने वाली अपनी बहन से शादी के बारे में चलिए शुरू करते हैं|

इस्लाम धर्म में बहन के साथ निकाह क्यों करते हैं?

दुनिया में बहुत सारे धर्म है हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी बौद्ध और भी बहुत से ऐसे धर्म है जिन्हें लोग मानते हैं और अक्सर यह देखा जाता है कि एक धर्म को मानने वाले लोग दूसरे के धर्म पर कीचड़ उछालने नजर आते हैं। बहुत सी ऐसी बातें हैं जो अलग-अलग धर्मों के बारे में फैलाई गई हैं कुछ में सच्चाई होती है लेकिन कुछ में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं होती इसलिए बिना तर्क के किसी भी धर्म पर उंगली उठाना सही नहीं है। वैसे भी हमारे हिंदू धर्म में हमेशा से यही सिखाया गया है और सिर्फ हिंदू धर्म में ही क्यों किसी भी धर्म में किसी दूसरे धर्म को नीचा दिखाना या बुरा बताना नहीं सिखाया जाता। यह तो हम इंसानों की सोच है जो एक दूसरे पर इल्जाम लगाते नजर आते हैं। हम बात कर रहे थे इस्लाम धर्म में अपनी ही बहन से शादी करने के रिवाज के बारे में आप भी जानते होंगे कि इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग सिर्फ अपनी सगी बहन को छोड़कर परिवार की किसी भी दूसरी कजिन बहन से शादी कर सकते हैं फिर चाहे वह चाचा की लड़की हो मामा की लड़की हो या बुआ की लड़की किसी से भी शादी का रिश्ता बनाया जा सकता है। और दूसरे धर्म के लोग इसे सही नजर से भी नहीं देखते हैं क्योंकि दूसरे धर्मों में बहन को बहन के रूप में ही देखा जाता ह पत्नी के रूप में नहीं लेकिन आखिर इस्लाम धर्म में ऐसी प्रथा क्यों शुरू की गई क्या कारण था कि इस्लाम धर्म के लोग अपने ही बहनों से शादी रचाने लगे। आज के इस वीडियो में हम इसी बात का पता लगाने वाले हैं कि आखिर क्यों इस्लाम धर्म में अपनी बहन को अपनी पत्नी बना लिया जाता है।

इस्लाम धर्म में बहन के साथ निकाह क्यों करते हैं?

अगर इस्लाम धर्म की शुरुआत की बात करें तो इस धर्म की शुरुआत आज से लगभग 1400 पहले मक्का मदीना शहर से की गई थी कहा जाता है कि मदीना के पैगंबर माने जाने वाले पैगंबर मोहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म की नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने पूरी दुनिया में इस्लाम धर्म का प्रचार किया था और बहुत से लोगों को अपने इस धर्म में शामिल भी किया था मदीना के बाद मक्का में इस धर्म का बढ़ता चलन देखा गया जिसके बाद धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में फैल गया। पैगंबर मोहम्मद साहब ने हीं अल्लाह के उपदेशों को दुनिया के लोगों तक पहुंचाया था और इस्लाम धर्म के मानने वाले लोगों की पवित्र किताब कुराने पाक को भी उन्होंने ही रमजान के महीने में लिखा था। आज पूरी दुनिया में इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग दूसरे नंबर पर आते हैं  पहले नंबर पर क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले लोग आते हैं। इस्लाम धर्म पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है और हर साल इस धर्म को मानने वालों की बढ़ोतरी हो रही है इस्लाम धर्म का जो रूप हमें दिखाया जाता है असल में इस धर्म की सच्चाई कुछ और ही है।

इस्लाम धर्म में बहन के साथ निकाह क्यों करते हैं?

 इस्लाम धर्म के अंदर ऐसी मान्यता है जो एक इंसान को बेहतर इंसान बनाती है। इस्लाम धर्म में ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई इंसान दिल से अच्छा नहीं हो सकता तो वह सच्चा मुसलमान भी नहीं हो सकता। एक सच्चा मुसलमान होने के लिए इंसान का अच्छा होना बहुत जरूरी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस्लाम धर्म में सभी चीजों के ऊपर इंसानियत को रखा गया है साथ ही इस्लाम धर्म में दूसरे धर्म की इज्जत करने और बिना किसी जोर-जबर्दस्ती के इस्लाम का प्रचार करने का हुक्म है। यह बात अलग है कि हम इंसान धर्म का गलत तरह से प्रचार करते हैं और कुछ ऐसी हरकतें करते हैं जिससे कि लोगों की नजरों में धर्म की परिभाषा ही बदल जाती है।

यह बात आप जानते ही होंगे कि इस्लाम धर्म अपनाने वाली महिलाएं हमेशा काले रंग के बुर्के में होती हैं इस्लाम धर्म को मानने वाली महिलाओं की यही वेशभूषा होती है जो उन्हें अपनाना हीं होती है इसे नकाब भी कहा जाता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस्लाम की किसी भी किताब में ऐसा नहीं लिखा है कि औरतों को काले रंग के लिबास नहीं रहना होगा। इस्लाम से जुड़ी किसी भी किताब में या फिर कुरान शरीफ में ऐसा नहीं लिखा है कि औरतों को अपने पूरे शरीर को ढकना होगा। हां उसमें यह जरूर बताया गया है कि पुरुष हो या महिला उन्हें ढंग के कपड़े पहनना चाहिए।

 इस्लाम धर्म को लेकर दूसरी यह भी अफवाह है कि इस्लाम धर्म में औरतों को दबाया जाता है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस धर्म में औरतों को पूरी इज्जत दी जाती है और उनका दर्जा उतना ही ऊंचा होता है जितना बाकी धर्मों में होता है। इस्लाम में बेगम आयशा इस्लाम धर्म की सबसे शक्तिशाली औरत थी जिनका मिजाज अलग ही था। उन्हें ताकतवर महिला के रूप में हमेशा ही याद किया जाता है। पैगंबर मोहम्मद बैग 1613 ईसवी में मक्का के लोगों में इस्लाम धर्म का प्रचार कर रहे थे तभी से उनके दिए गए उपदेश लोग मानते आ रहे हैं। आपको बता दें कि इस्लाम धर्म में किसी भी बेगुनाह का कत्ल करना सख्त मना है और इसकी कोई भी माफी अल्लाह के घर में नहीं है। इस्लाम धर्म में शराब पीना पाप माना जाता है और इसे पीने की सख्त मनाही है। ऐसा माना जाता है कि शराब सारी बुराइयों की जड़ है जो धर्म और कर्म दोनों से हमें दूर कर देती है और हमें बुरा इंसान बनाती है।

शराब को हाथ लगाना भी एक सच्चे मुसलमान के लिए पाप के समान है। आपको बता दें कि जिन कॉस्मेटिक या फिर दूसरी चीजों में अल्कोहल का इस्तेमाल होता है वो चीजें भी इस्लाम धर्म मानने वाले लोगों के लिए जायज नहीं है। उन्हें इस्तेमाल करने पर भी वह पाप के भागीदार बन जाते हैं। एक मुसलमान के लिए रोज पांच वक्त की नमाज जरूरी बताई गई है। चाहे लड़का हो या लड़की उन्हें हर रोज पांच वक्त की नमाज जरूर अदा करनी चाहिए। इसके अलावा खैरात जकात रोजे रखना और बकरीद पर कुर्बानी देना भी इस्लाम धर्म में जरूरी समझा गया है। आप जानते ही होंगे कि हिंदू चार धाम की तीर्थ यात्रा करते हैं उसी प्रकार मुसलमान भी हज यात्रा करके अपने तीर्थ पूरे करते हैं जो कि मक्का मदीना जैसे पवित्र स्थानों पर होता है। पूरी दुनिया से मुसलमान बकरीद के बाद हज की यात्रा के लिए निकल जाते हैं और यह हज यात्री हाजी काबा में जाकर अपनी हज यात्रा को पूरा करते हैं। यह यात्रा 3 दिन की होती है और कोई भी मुसलमान काबा में तीर्थ के लिए साल में दो बार जा सकते हैं पहला तो बकरीद के बाद जिसे हज कहते हैं और दूसरा साल में किसी भी वक्त जिसे उमराह कहा जाता है। अब बात करते हैं इस्लाम धर्म में अपने बहन से शादी करने के रिवाज पर दरअसल हिंदू धर्म में परिवार की किसी भी बेटी के साथ शादी नहीं की जा सकती क्योंकि परिवार की हर बेटी बहन होती है इस्लाम धर्म में ऐसा नहीं होता इस्लाम धर्म में अपनी सगी बहन को छोड़कर दूसरी किसी भी बेटी से या बहन से शादी कर सकते हैं क्योंकि इस्लाम धर्म में सिर्फ अपनी सगी बहन को ही बहन माना जाता है बाकी किसी को भी बहन का दर्जा नहीं दिया जाता। इस्लाम धर्म में दाढ़ी बढ़ाने का भी रिवाज होता है दाढ़ी ना कटाने का हुक्म दिया जाता है जैसे कि सिख धर्म में भी सिख लोग अपने बाल और दाढ़ी बढ़ाकर रखते हैं उन्हें वह काटने की इजाजत नहीं होती उसी तरह से इस्लाम धर्म में भी ऐसा ही होता है।

इस्लाम धर्म में जब किसी की मौत हो जाती है तो उन्हें मिट्टी में दफना दिया जाता है। इस्लाम धर्म में ऐसी मान्यता है कि कयामत के दिन जब सब का हिसाब लिया जाएगा तो अल्लाह हम इंसानों को हमारी कब्र से पहचान लेंगे और हमें उठाकर हमसे सवाल जवाब किया जाएगा। तब उन्हें उनके कर्मों के हिसाब से सजा दी जाएगी और कर्मों के हिसाब से ही अल्लाह उन्हें जन्नत या दोजक में जगह देंगे। ऐसा कहा जाता है कि जब कयामत आएगी तो उस वक्त सिर्फ नमाज ही मुसलमान को बचा पाएगी। इस्लाम धर्म में एक साथ चार बीवियां रखने का भी हुक्म होता है पहले के समय में एक आदमी एक साथ चार शादियां कर सकता था हालांकि अब नियम बदल चुके हैं। इस्लाम अपने शरीयत कानून पर ही चलता है और हर मुसलमान अपने शरीयत कानून पर ही भरोसा करते हैं और उसके हिसाब से ही चलते हैं। इस्लाम धर्म में मांस खाना भी जायज माना जाता है और मांस खाने की छूट दी गई है लेकिन कोई भी मुसलमान किसी हराम जानवर का मांस नहीं खा सकता। हराम जानवर उन जानवरों में आते हैं जिन्हें अल्लाह के नाम पर कुर्बान नहीं किया गया हो जो किसी बीमारी या दूसरी वजह से मर गए हो। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि पहले से मरे हुए किसी भी जानवर का मांस खाना इस्लाम धर्म में सही नहीं माना गया है। इसके अलावा सूअर इस्लाम धर्म में नहीं खाया जाता इसका मांस खाना इस्लाम धर्म में जायज नहीं है यहां तक कि इसका नाम लेना भी इस्लाम में हराम माना जाता है। इसी तरह के और भी कई नियम है जो इस्लाम धर्म में माननीय होते हैं इस्लाम धर्म दुनिया में तेजी से फैलता हुआ धर्म है जो कि दूसरे धर्मों की इज्जत करना और उन्हें पूरा सम्मान देना सिखाता है।

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